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Bihar Land Revenue: बकाया लगान पर सरकार सख्त, 45 हजार मौजों में बड़े बकायेदारों की होगी पहचान

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में बकाया जमीन लगान की वसूली के लिए राजस्व विभाग ने करीब 45 हजार मौजों में बड़े बकायेदारों की पहचान शुरू की है। रैयतों को SMS के जरिए सूचना भेजी जाएगी।

पटना, 30 अगस्त। बिहार में जमीन का लगान बकाया रखने वाले रैयतों पर सरकार ने अब सख्ती बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सरकारी राजस्व की वसूली तेज करने के लिए राज्य के करीब 45 हजार मौजों में बड़े बकायेदारों की पहचान करने की कवायद शुरू की है। योजना के तहत प्रत्येक मौजा से 100 बड़े बकायेदारों को चिन्हित किया जाएगा और उन्हें मोबाइल फोन पर SMS भेजकर बकाया लगान जमा करने की सूचना दी जाएगी।

राजस्व विभाग की ओर से इस संबंध में NIC बिहार स्टेट सेंटर के राज्य सूचना विज्ञान पदाधिकारी को पत्र भेजा गया है। विभाग ने रैयतों को SMS के माध्यम से बकाया लगान की जानकारी देने और इस पूरी प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। कई जिलों में बड़े बकायेदारों की पहचान कर उन्हें संदेश भेजने का काम भी शुरू होने की जानकारी सामने आई है।

सरकार की इस पहल का मकसद बकाया लगान की वसूली को डिजिटल माध्यम से तेज करना है। लेकिन इसके रास्ते में बिहार के पुराने जमीन रिकॉर्ड बड़ी समस्या बने हुए हैं। राज्य में आज भी बड़ी संख्या में जमीन की जमाबंदी पुराने मालिकों या उनके पूर्वजों के नाम पर दर्ज है। ऐसी स्थिति में वर्तमान रैयत का मोबाइल नंबर रिकॉर्ड से जुड़ा नहीं होने के कारण उसे सीधे SMS भेजना मुश्किल हो जाता है।

आंकड़ों के मुताबिक बिहार में करीब 1.82 करोड़ रैयत हैं और इनके नाम लगभग 4.80 करोड़ जमाबंदियां दर्ज हैं। जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े को रोकने और सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन तरीके से रैयतों तक पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार वर्ष 2021 से जमाबंदी को आधार और मोबाइल नंबर से जोड़ने का अभियान चला रही है।

इसके बावजूद बड़ी संख्या में जमीन के रिकॉर्ड अभी पुराने नामों पर दर्ज हैं। कई परिवारों में जमीन का आपसी बंटवारा तो हो चुका है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसका नामांतरण नहीं कराया गया है। इसी तरह उत्तराधिकार के बाद भी कई जमीनों पर नए मालिकों का नाम रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुआ है।

राजस्व महाअभियान के दौरान आए आंकड़े भी इस समस्या की गंभीरता को सामने रखते हैं। अभियान में बंटवारा नामांतरण के करीब 2.51 लाख आवेदन मिले। वहीं उत्तराधिकार नामांतरण के लगभग 2,97,195 आवेदन प्राप्त हुए। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में जमीन के रिकॉर्ड को अभी वर्तमान स्थिति के अनुसार अपडेट किया जाना बाकी है।

जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड में मौजूद पुरानी गलतियां भी विभाग के सामने बड़ी चुनौती हैं। विभाग के अनुसार वर्ष 2012 में जमीन सर्वे कराने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद पुराने दस्तावेजों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू हुई और इसके लिए एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई।

आरोप है कि पुराने रिकॉर्ड को ऑनलाइन दर्ज करने के दौरान कई मामलों में खाता, खेसरा और थाना नंबर जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों में गलतियां रह गईं। अब इन्हीं त्रुटियों को ठीक कराने के लिए जमीन मालिकों को आवेदन करना पड़ रहा है।

राजस्व महाअभियान के दौरान जमाबंदी में त्रुटि सुधार के लिए करीब 33.34 लाख आवेदन मिलना इस समस्या के बड़े स्तर को दिखाता है। इसके अलावा लगभग 5.68 लाख आवेदन ऐसी जमाबंदियों को ऑनलाइन कराने के लिए आए, जो अभी तक ऑफलाइन रिकॉर्ड में थीं।

यानी सरकार के सामने एक तरफ बकाया लगान की वसूली बढ़ाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ उस वसूली के लिए इस्तेमाल होने वाले जमीन रिकॉर्ड को सही करने की जिम्मेदारी भी है। यदि जमाबंदी में वर्तमान रैयत का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज नहीं है तो SMS के माध्यम से बकाया लगान की सूचना पहुंचाना मुश्किल होगा।

राजस्व विभाग की कोशिश है कि जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से अपडेट किया जाए। जमाबंदी को आधार और मोबाइल नंबर से जोड़ा जाए और बकाया लगान की वसूली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। इसके लिए नामांतरण, बंटवारा और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों के निपटारे पर भी जोर दिया जा रहा है।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार में शामिल दोषी लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

मंत्री के अनुसार जमीन सर्वे का काम पूरा होने के बाद राज्य के करीब 80 फीसदी भूमि विवाद हमेशा के लिए खत्म हो सकते हैं। उन्होंने RCMS पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन समस्याओं के समाधान की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक करीब 20 फीसदी ऑनलाइन समस्याओं का निपटारा किया जा चुका है।

सरकार की मौजूदा रणनीति से साफ है कि आने वाले समय में जमीन के रिकॉर्ड और लगान वसूली को ज्यादा से ज्यादा डिजिटल बनाने की तैयारी है। बड़े बकायेदारों को मोबाइल SMS के जरिए सूचना भेजना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।

हालांकि, इस व्यवस्था की सफलता काफी हद तक जमीन के रिकॉर्ड की शुद्धता पर निर्भर करेगी। जब तक पुरानी जमाबंदियों में दर्ज नाम, खाता-खेसरा और मोबाइल नंबर जैसी जानकारियां सही नहीं होतीं, तब तक डिजिटल राजस्व व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावी बनाना आसान नहीं होगा।

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EDITORIAL COMMENTARY:

बिहार में जमीन का लगान वसूलने के लिए सरकार का डिजिटल अभियान निश्चित रूप से महत्वपूर्ण कदम है। मोबाइल SMS के जरिए बड़े बकायेदारों तक सूचना पहुंचाने से राजस्व वसूली में तेजी आ सकती है और लोगों को भी समय पर अपने बकाये की जानकारी मिल सकती है।

लेकिन इस पूरी व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी जमीन के पुराने रिकॉर्ड हैं। जब जमीन किसी परिवार की अगली पीढ़ी के पास पहुंच चुकी हो और सरकारी रिकॉर्ड में अभी भी पुरखे का नाम दर्ज हो, तब डिजिटल सिस्टम की उपयोगिता सीमित हो जाती है।

33 लाख से अधिक जमाबंदी सुधार के आवेदन और लाखों नामांतरण संबंधी आवेदन यह बताते हैं कि समस्या केवल कुछ रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। इसलिए सरकार को लगान वसूली के साथ रिकॉर्ड सुधार को भी समान प्राथमिकता देनी होगी।

सही और अपडेटेड जमीन रिकॉर्ड सिर्फ लगान वसूली के लिए जरूरी नहीं हैं, बल्कि जमीन विवाद कम करने, सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और ऑनलाइन सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए भी जरूरी हैं।

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